समझ आया ना ये सीएलसी का “highest growth” का खेल ?

देखो भाई, CLC हर साल रिजल्ट आने के बाद अखबार में बड़े-बड़े पोस्टर छपवाती है। उसमें लिखा होता है – “हमारी ग्रोथ सबसे ज्यादा!” “2 गुना बढ़ गए”, “3 गुना बढ़ गए”, “4 गुना बढ़ गए”। ग्राफ बनाते हैं, बार दिखाते हैं, तीर ऊपर की तरफ, और बड़ा-बड़ा नंबर लिख देते हैं।

लोग देखते हैं तो सोचते हैं – वाह, क्या कमाल की कोचिंग है, हर साल रिजल्ट्स दोगुने-तिगुने हो रहे हैं!

अब इन पोस्टरों को गौर से देखो:

 

– 2023 वाला पोस्टर: 537 AIR रैंक्स, 99.96%ile तक के टॉपर्स।
– 2024 वाला: “हम बढ़े 4 गुना”, 64 बच्चे 99%ile के ऊपर।
– 2025 वाला: “2 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी”, 66 बच्चे AIR 25000 के अंदर।
– 2026 वाला: “3 गुना ग्रोथ”, 33 बच्चे 99%ile के ऊपर।

हर साल नया पोस्टर, नया ग्राफ, नया “highest growth” का दावा। लगता है जैसे CLC में जादू हो रहा है – रिजल्ट्स हर साल आसमान छू रहे हैं।

अब असली पोल खोलते हैं।

मान लो 1996 में CLC शुरू हुई थी। शुरू-शुरू में बहुत कम स्टूडेंट्स थे, कहते हैं 10-20 सिलेक्शन होते थे। अगर हर साल सिर्फ 2 गुना ग्रोथ मानें (जो इन पोस्टरों में तो 3-4 गुना दिखाते हैं), तो 30 साल बाद क्या होगा?

10 × 2^30 = 10,737,418,240 यानी एक करोड़ से भी ज्यादा सिलेक्शन !

लेकिन भाई, NEET में कुल सिलेक्शन सिर्फ 1 लाख के आसपास होते हैं, JEE Advanced में 10-11 हजार सीटें। अगर CLC सच में हर साल 2-4 गुना बढ़ रही होती, तो आज पूरे भारत की सारी मेडिकल और IIT की सीटें सिर्फ CLC के स्टूडेंट्स भर लेते। बाकी कोचिंग्स तो बंद हो जातीं!

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

तो ये “highest growth” क्या है?

ये सिर्फ अखबार में दिखाने का चोंचला है। हर साल एक नया ग्राफ बनाते हैं, एक नया बेस साल चुनते हैं, टोटल सिलेक्शन की संख्या गिनते हैं, और % निकालकर इतना बड़ा दिखाते हैं कि लगे कमाल हो गया। कभी पिछले साल का बेस कम रखते हैं, कभी सिर्फ “सिलेक्शन” शब्द यूज करते हैं (क्वालीफाई या एडमिशन, कुछ भी), कभी सिर्फ अपने क्लासरूम वाले स्टूडेंट्स गिनते हैं, कभी पूरा बैच।

असल में 30 साल से यही खेल चल रहा है।
हर साल पोस्टर में “सबसे ज्यादा ग्रोथ” लिखकर नया बैच भरते हैं। पैरेंट्स देखते हैं, सोचते हैं “वाह, ये तो हर साल बेहतर हो रही है”, और बच्चे भेज देते हैं। लेकिन अगर सच में 30 साल से इतनी ग्रोथ होती, तो आज CLC अकेली पूरे देश की सभी परीक्षाओं की सारी सीटें भर देती।

ये सिर्फ मार्केटिंग का तमाशा है – अखबार में चमकने का, एडमिशन बढ़ाने का। असल ग्रोथ नहीं, सिर्फ कागज पर ग्रोथ।

अगली बार कोई कोचिंग “highest growth” का पोस्टर दिखाए, तो खुद सोचना – अगर ये सच होता तो आज क्या हाल होता? 😂

बस यही पोल है भाई।

क्या लगता है, अब समझ आया ना ये खेल? 😜

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